क्या हम इन विशंगतियु को दूर कर पाएंगे जो हमें हर पल जाती ,धर्म भाषा ,के नाम पर तोड़ रही है.हमें अपने जमीर से दूर कर रही है हम बिना देखे उन अनजान रास्तो पर जा रहेहै जहाँ सिर्फ़ अँधेरा और सिर्फ़ अँधेरा ही है जहाँ इंसानियत अन्धकार के साये में सो जाती है और हम सिर्फ़ बनकर रहा जाते है उन भेडोंकी तरह जो सिर्फ़ चली जा रही है एक अंधेरे कुँए में बिना कुछ सोछे
इस्वर ने अपनी बनाई हुई स्रष्टि कू सवारने के लिए इन्सान बनाया ,उसको दिल दिया रिस्तो ,भावनाओ को समछ ने के लिए,उर दिमाक अच्छे बुरे की पहचान की लिए पर हम आज उसी का दूर उपयुग कर रहे है चाहे वो मान्सुमो को धर्म की नाम पर बरगलाना चाहे फ़िर वो किसी भी धर्म के ठेक्र दार हो ,राजनीत की रोटिया सकने वाले ,या फ़िर हम जो इन की बातो में आते है और अपने दिल और दिमाक को बंद कर रखा है।हम इन्सान है कुछ समछ लाये हमारे लिए बेहतर होगा क्यूँ की अगर हम एक बेहतर आज न बना सके तो एक बेहतर कल बनाना muskil है तो जगू आज को सवारों सर्वा धर्म सम्भाव लायें यही एक बेहतर युक्ति है
धन्यवाद आज का यूथ
Monday, 13 April 2009
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Arti ji samaj to koi sudhar hi nahi sakta hai isliye to bhagwan ne bhi avtar lena chod diya hai ek bura insaan ho to bhagwan bhi avtar le le par is kalyug mein to mein kya, aap kya, sab ke sab hi bure hai isliye accha hoga ki hum sirf apne galewan mein jhank kar dekhein aur apni buraiyon ko aur kamiyon ko door karein is tarah shayad marne ke baad hamara mela arthat hamari atma ka mela paramshakti se ho jaye jise hum bhagwan kehte hai........
ReplyDeleteisliye kehta hun khud sudharein to jag sudhare.
आपने बातें तो बहुत अच्छी कहीं ....अच्छे विचार हैं आपके ....लेकिन चाहे कोई भी हो खुद भी पहल करनी पड़ती है
ReplyDeleteमेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति
सबसे जरूरी यह है कि शुरूआत खुद से ही करें किसी बड़े परिवर्तन के लिए चमत्कार जैसा कुछ नहीं होता पहल जरूरी है । सोच सकारात्मक है ।
ReplyDeleteभाव तो अच्छे हैं मगर हिज्जे करें सुधार।
ReplyDeleteतभी सफल होगा कोई सार्थक रहे विचार।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
dono vichar achchhe hain.Yuva keval sochate hi nahi kargujarte bhi hai.
ReplyDeleteachchha laga aapko padh kar. likhte rahein.
Navnit Nirav
Ideology is nice and glittering but who is going to break the ice...before looking for one outside your domain....WHO ELSE EXCEPT YOU ..good luck
ReplyDeleteबहुत सुन्दर आपका स्वागत है ब्लॉग जगत में ...........
ReplyDeleteआप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं.
ReplyDeletePawan Mall
http://latife.co.nr/
समाज को बदलने के लिए हमें स्वयं से शुरूआत करनी चाहिए। कथनी करनी में फर्क नहीं होना चाहिए।
ReplyDeleteश्याम बाबू शर्मा
http://shyamgkp.blogspot.com
http://bhoolibisari.blogspot.com
This comment has been removed by the author.
ReplyDeleteलगता है आपको हिन्दी लिखने में परेशानी हो रही है और परेशानी की मूल वजह ये है कि आप गूगल की इंडिक ट्रांस्लिट्रेशन सेवा का इस्तेमाल कर रही हैं। अगर आप किसी टाइपराइटर मॉड्यूल में टाइपिंग सीखने की इच्छुक हैं, तो आपको कैफे हिन्दी टाइपिंग टूल का इस्तेमाल करना चाहिए या फिर अपने कम्प्यूटर पर रीजन एंड लैंग्वेज सेटिंग को हिन्दी अपग्रेड करना चाहिए। मैं चाहता हूं कि हिन्दी लिखने वाले सारे भाई-बहन अच्छी हिन्दी लिखें। इसके लिए ज़रूरी साफ्टवेयर अगर आपको चाहिए, तो किसी भी पुराने चिट्ठाकार साथी से मिल जायेगा।
ReplyDeleteरांचीहल्ला
बिलकुल सही कहा आपने, क्योंकि पंखों से नहीं हौसलों से उडान होती है।
ReplyDelete----------
तस्लीम
साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन
narayan...narayan
ReplyDeletebahut sundar vichar.
ReplyDeleteachcha likha hai aapney
kabhi fursat ho to mere blog per bhi aayen aur comment bhi dein
http://www.ashokvichar.blogspot.com